-नित छंद- लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप जून 10, 2018 -नित छंद- बारह के भार धरत । सुग्घर नित छंद बनत लघु गुरू या नगण धरे । चरणन के अंत करे जइसे- पइसा जग मा बड़का । पइसा जीवन तड़का रिश्ता नाता पइसा । करव बुता जस भइसा नीत-रीत संग घरव । काम-बुता अपन करव बिना काम कहां जगत । दुख पीरा रहय फकत लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप टिप्पणियाँ
-लीला छंद- जून 10, 2018 -लीला छंद- बारह के धरत भार । लेवव लीला सवार चरण अंत जब जभान । तब लीला छंद मान जइसे- भज ले मन राम-राम । दुनिया के करत काम कर्म जगत मा प्रधान । जानव मानव सुजान चाल चलन रखव नेक । कहय राम गोठ नेक राम संग राम गोठ । अंतस भर रहब पोठ और पढ़ें
-अहीर छंद- जून 10, 2018 -अहीर छंद- धरे एकादश भार । अंत जगण भर डार बनही छंद अहीर । मन मा धारव धीर जइसे- खोलव ज्ञान कपाट । देखव रूप विराट जेखर ओर न छोर । एको मिलय न कोर जेखर आघु पहाड़ । लागत रहय कबाड़ धुर्रा-कण कस जान । जतका दिखय समान जेखर हाथ हजार । लागय नार-बियार कतका पाँव गिनाँव । कतका बुद्धि लमाँव आँखी मुँह अउ कान । गिनय कोन गुणवान कतका हवय नाक । देखत रहय ताक मुड़ हजारो हजार । कोने पावय पार अतका भरे उजास । मरय सुरूज हर प्यास कुण्डल चमकत कान । लाखों सुरूज समान येही दिव्य सरूप । हे नारायण रूप और पढ़ें
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