-निधि छंद-


-निधि छंद-
नौ मात्रा कंत । गुरू लघु ले अंत
गढ़ अइसे बंद । बनही निधि छंद

जइसे-
सुन ऊंखर बात । सूतजी अघात
सुन लौं मन लाय । गुरू जेन बताय
लइकापन आय ।  शुक जंगल जाय
ले बर सन्यास । मन भरे उजास
देखय जब बाप । सह सकय न ताप
शुक-शुक चिल्लाय । बेटा ल बलाय
शुक सुनय न बात । अपन धुन म जात
शुक ल रमे जान । पेड़ मन तमाम
बोलय सुन व्यास । छोड़व अब आस
बोलत हे सूत । शुकजी अद्भूत
ओ शुक के पाँव । मैं माथ नवाँव
हे नेक सवाल । प्रभु कथा कमाल

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