-गंग छंद-


-गंग छंद-
हे चरण चारे । नौ भार धारे
नौ गंग भाखे । गुरू अंत राखे


जइसे-
मन श्याम राखे । शुक व्यास भाखे
सुन एक बेरा । ऋषि करिन डेरा
हरि क्षेत्र आके । सब जुरीयाके
भगवान पाये । यज्ञे रचाये
कर सूत पूजा । विधि कई दूजा
सब हाथ जोरे । मन गांठ छोरे
शुभ प्रश्न पूछे । मन जेन रूचे
हे सूत देवा । ये मान सेवा
हस वेद ज्ञाता । अउ पुण्य दाता
कलिकाल घोरे । बड़ पाप जोरे
विधि कोन अच्छा । जे करय रक्षा
ओ कथा दे दौ । ओ रीति दे दौ

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

-अहीर छंद-

-भव छंद-

-तोमर छंद-