-नित छंद- बारह के भार धरत । सुग्घर नित छंद बनत लघु गुरू या नगण धरे । चरणन के अंत करे जइसे- पइसा जग मा बड़का । पइसा जीवन तड़का रिश्ता नाता पइसा । करव बुता जस भइसा नीत-रीत संग घरव । काम-बुता अपन करव बिना काम कहां जगत । दुख पीरा रहय फकत
-भव छंद- भव मा भार ग्यारा । जग ला लगय प्यारा आखिर दीर्घ भरथे । यगण घला भव रथे जइसे- व्यास कला रूप हे । अपने मा अद्भूत हे वो तीनों काल ला। जानय हर हाल ला अपन दृश्टि खोल के । देखय कुछु बोल के लोग समय फेर मा । करय धरम ढेर मा वेद ज्ञान भुलाये । अपन ज्ञान लमाये मनखे धरय रद्दा । छोड़य काम भद्दा अइसे वो सोच के । बात सबो खांच के वेद मन ल बाँट के । अलग करिस छाँट के
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