-सुगती छंद-
-सुगती छंद-
चार चरणा । सात गनना
अंत करले । बड़े धरले
तीन चारे । भार डारे
धरव सुमती । रचव सुगती
जइसे-
ष्याम राधे । श्याम राधे
मोर भारे । तहीं धारे
दया कर के । हाथ धर के
संग कर लौ । संग कर लौ
चरित तोरे । करय भोरे
जगत तारे । पाप हारे
नाम तोरे । रूप तोरे
तोर दाया । मिटय माया
श्याम मोरे । हाथ जोरे
करवं विनती । सुनव विनती
दरस दे दौ । परस दे दौ
पूर्ण कर दौ । एक वर दौ
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